बांस की बोतल, एक कदम पर्यावरण संरक्षण की ओर
बांस की बोतल के अविष्कार ने भारत को प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की ओर मजबूत आधार प्रदान किया है सबसे अच्छी बात है कि बांस की बोतल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक से निर्मित है जो भारत के मेक इन इंडिया के सपने में पंख लगने के समान है|
आविष्कारक - धृतिमान बोरा
निवास स्थान - विश्वनाथ चाराली ( असम गुवाहटी)
पेशा - स्वदेशी तकनीक से निर्मित उद्योग
बोतल की खासियत -
पर्यावरण के अनुकूल इन बोतलों का निमार्ण के लिये टिकाऊ बांस भालुका का उपयोग किया जाता है बोतलों मे पूरी तरह से बांस का ही उपयोग होता है यहा तक कि बोतल का डक्कन भी बांस से ही बनाया जाता है, बांस से निर्मित बोतल पूरी तरह से वाटर प्रूफ होने के साथ-साथ तेज धूप में पानी को ठंडा रखती है जो बोतल को अत्यधिक उपयोगी बनाते हैं|
बोतल को वाटर प्रूफ बनाने के लिए बोतलों की बाहरी परत को वाटर प्रूफ ऑइल से पॉलिश किया जाता है जो बोतल को आकर्षक बनती है|
पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण ईन बोतल को आसानी से नष्ट किया जा सकता है और इनसे किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैलेगा
बोतल की क्षमता - 750 मिली
बोतल की कीमत - 250 से 900 के बीच
उपलब्ध - अक्टूबर 2019 से ऑनलाइन, खादी स्टोर
बनाने का उद्देश्य / लाभ -
आम तौर पर बाजार में उपलब्ध पानी प्लास्टिक की बोतल में मिलता है साथ अधिकतर लोग पानी रखने के लिए प्लास्टिक की बोतल का ही उपयोग करते हैं, प्लास्टिक हानिकारक होता है जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा तो रहता ही है, प्लास्टिक पर्यावरण को भी अधिक मात्रा में नुकसान पहुंचाता है| बांस से बनी ये बोतल ना तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं और ना ही इनसे कोई बीमारी का खतरा रहता है | इसके साथ बांस से निर्मित लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होगे|
अतिरिक्त जानकारी -
निर्माण कर्ता बोरा के अनुसार उन्हें एक बोतल बनाने के लिए 4-5 घंटे का समय लगता है, जिसमें बांस की कटाई, सुखाने, पॉलिशिंग जैसे कार्य शामिल हैं |
बोरा बताते हैं कि वे इस प्रकार की बोतल बनाने के लिए काफी सालो से कोशिश कर रहे हैं जिसमें लगभग 17 साल का समय लग गया तब जाकर वे इसका निर्माण कर सके|
बांस की बोतल के अविष्कार ने भारत को प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने की ओर मजबूत आधार प्रदान किया है सबसे अच्छी बात है कि बांस की बोतल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक से निर्मित है जो भारत के मेक इन इंडिया के सपने में पंख लगने के समान है|
आविष्कारक - धृतिमान बोरा
निवास स्थान - विश्वनाथ चाराली ( असम गुवाहटी)
पेशा - स्वदेशी तकनीक से निर्मित उद्योग
बोतल की खासियत -
पर्यावरण के अनुकूल इन बोतलों का निमार्ण के लिये टिकाऊ बांस भालुका का उपयोग किया जाता है बोतलों मे पूरी तरह से बांस का ही उपयोग होता है यहा तक कि बोतल का डक्कन भी बांस से ही बनाया जाता है, बांस से निर्मित बोतल पूरी तरह से वाटर प्रूफ होने के साथ-साथ तेज धूप में पानी को ठंडा रखती है जो बोतल को अत्यधिक उपयोगी बनाते हैं|
बोतल को वाटर प्रूफ बनाने के लिए बोतलों की बाहरी परत को वाटर प्रूफ ऑइल से पॉलिश किया जाता है जो बोतल को आकर्षक बनती है|
पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण ईन बोतल को आसानी से नष्ट किया जा सकता है और इनसे किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं फैलेगा
बोतल की क्षमता - 750 मिली
बोतल की कीमत - 250 से 900 के बीच
उपलब्ध - अक्टूबर 2019 से ऑनलाइन, खादी स्टोर
बनाने का उद्देश्य / लाभ -
आम तौर पर बाजार में उपलब्ध पानी प्लास्टिक की बोतल में मिलता है साथ अधिकतर लोग पानी रखने के लिए प्लास्टिक की बोतल का ही उपयोग करते हैं, प्लास्टिक हानिकारक होता है जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा तो रहता ही है, प्लास्टिक पर्यावरण को भी अधिक मात्रा में नुकसान पहुंचाता है| बांस से बनी ये बोतल ना तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं और ना ही इनसे कोई बीमारी का खतरा रहता है | इसके साथ बांस से निर्मित लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होगे|
अतिरिक्त जानकारी -
निर्माण कर्ता बोरा के अनुसार उन्हें एक बोतल बनाने के लिए 4-5 घंटे का समय लगता है, जिसमें बांस की कटाई, सुखाने, पॉलिशिंग जैसे कार्य शामिल हैं |
बोरा बताते हैं कि वे इस प्रकार की बोतल बनाने के लिए काफी सालो से कोशिश कर रहे हैं जिसमें लगभग 17 साल का समय लग गया तब जाकर वे इसका निर्माण कर सके|



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